धनेश्वरनाथ शिव मंदिर में हैं स्वयंभू शिवलिंग, बना है आस्था का केन्द्र
सनातन हिंदू धर्म में सावन शिव को इस कारण समर्पित है क्योंकि मान्यता है कि सावन के आरंभ में भगवान विष्णु योगनिद्रा में लीन हो जाते हैं और इस सारे संसार की सत्ता संचालन का दायित्व प्रभु शिव के हाथों में होता है। इस साल सावन 04 जुलाई दिन मंगलवार से शुरू हो गया और 31अगस्त दिन गुरूवार 2023 को समाप्त होगा। इस साल सावन में कुल आठ सोमवार पड़ेंगे। सावन के सोमवार में भक्त द्वादस ज्योतिर्लिंग की आराधना करते हैं और पवित्र नदियों के जल से, दुग्ध से,गन्ने के रस से भगवान शिव का अभिषेक करते है। ऐसे ही क्षेत्र के धनौती गांव स्थित धनेश्वर नाथ धाम शिव मंदिर है जो ऐतिहासिक एवं पौराणिक मंदिरों में से एक है। जिला मुख्यालय से 17 किमी दूर बलिया-सिकन्दरपुर राष्ट्रीय राजमार्ग से तीन किमी पश्चिम पचखोरा- रतसर मार्ग के बीच धनौती गांव स्थित है। यह शिव मंदिर भक्तों के लिए आस्था का केन्द्र बना हुआ है। इस मंदिर में भक्त सच्चे मन से जो भी कामना करते हैं उनकी मनोकामना की पूर्ति बाबा धनेश्वरनाथ अवश्य करते है। मंदिर के चारो तरफ सुरम्य बागीचा से आच्छादित है। बाबा धनेश्वर नाथ मंदिर परिसर में अन्य देवी देवताओं का भी मंदिर है जहां अनवरत भजन-कीर्तन एवं प्रवचन चलता रहता है। ऐसे तो प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को काफी संख्या में भीड़ लगती है। लेकन सावन मास एवं शिवरात्रि के समय भक्तों का तांता लग जाता है। प्राचीन मान्यता के अनुसार यह क्षेत्र जंगल से आच्छादित था। चरवाहे अपने पशुओं को लेकर आया करते थे। इसी बीच एक दिन एक चरवाहा पेड़ के नीचे विश्राम कर रहा था। उसे भूख लगी थी। अचानक उसके सामने भोजन की थाली प्रकट हो गई। चरवाहा अचंभित हो गया और इधर उधर नजर दौड़ाई तो देखा कि भोजन की थाली के निकट जमीन में आधा धंसा शिवलिंग है। चरवाहे ने गांव वालों को पूरा वृतांत बताया। तब से लोग इस स्थान पर शिवलिंग का पूजन करने लगे। आज भी शिवरात्रि के दिन यहां मेला लगता है। जहां श्रद्धालु बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते है।
