कलशयात्रा के साथ प्रारंभ हुई सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा
कलशयात्रा का पलक पांवड़े बिछाकर किया गया जगह जगह स्वागत
अरविन्द पाठक
दमोह। नगर की आस्था की केन्द्र बिन्दु मां बड़ी देवी मंदिर में देवी चित्रलेखा जी के मुखारविंद से होने वाली श्रीमद्भागवत कथा कि भव्य कलशयात्रा स्थानीय बूंदावहू मंदिर से प्रारंभ हुई जो उमा मिस्त्री तलैया, बड़ा पुल, महाकाली चौराहा, गौरीशंकर तिगड्डा से होकर मां बड़ी देवी मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा प्रारम्भ हुई। इस दौरान कलशयात्रा का जगह जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। श्रीमद्भागवत कथा 25 मार्च से 03 मार्च 2023 तक चलेगी और 04 मार्च को हवन पूजन और प्रसाद वितरण किया जाएगा।
कलशयात्रा में मुख्य जजमान श्रीमती सुमन देवी राय ने विधिवत पूजन किया।
पहले दिन देवी चित्रलेखा ने भागवत कथा का महत्व बताते हुए कहा कि जिस तरह गंगा मैया प्राचीन हो सकती है, पुरानी नहीं हो सकती, उसी प्रकार श्रीमद् भागवत कथा गंगा भी प्राचीन है, कभी पुरानी नहीं हो सकती। श्रीमद् भागवत कथा चंद्रमा की चांदनी है। इसका प्रकाश चंद्रमा की चांदनी की तरह जीवन के हर कठिन समय में शीतलता प्रदान करती है।केवल ज्ञान ही एक ऐसा अक्षय तत्त्व है, जो कहीं भी किसी अवस्था और किसी भी काल में मनुष्य का साथ नहीं छोड़ता।
उन्होंने कहा कि मन आपका है। आप इसे जहाँ चाहें लगाएं। चाहें तो इसे प्रभु भक्ति में समर्पित करे या चाहें तो विषय भोगों में लगा लें। मन की प्रकृति नीच है। इसे केवल बुरे कर्म ही अच्छे लगते हैं। यह जानबूझ कर अमृत को त्याग हर प्रकार की विषय-वासना में लिप्त रहता है। मन वासनाओं का मुरीद है। ध्यान, सत्संग और सिमरन इसके शत्रु हैं। यह परमात्मा से दूर भागता है। अगर जीवन में सुख शान्ति चाहिए, आनन्द चाहिए, उत्सव चाहिये तो परमात्मा ही एक सहारा है।
