गायत्री शक्तिपीठ में दो दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव संपन्न हुआ

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गायत्री शक्तिपीठ में दो दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव संपन्न हुआ ।2 जुलाई रविवार को 12 घंटे का गायत्री मंत्र का अखंड जप हुआ एवं सोमवार को प्रातः 7:00 से गुरु पूजन ,गुरु तत्व का विवेचन एवं अंत में पंच कुंडीय गायत्री महायज्ञ संपन्न हुआ। शांतिकुंज से पधारी टोली प्रमुख पंडित सुनील शर्मा द्वारा गुरुत्व पर उद्बोधन दिया गया। उन्होंने विस्तार से बताया की गुरु दीक्षा कौन दे सकता है ?  गायत्री मंत्र ही वास्तव में गुरुमंत्र है । जिस प्रकार स्कूल कॉलेज की शिक्षा लेने के बाद व्यक्ति भौतिक जगत में पद प्रतिष्ठा पाता है उसी प्रकार अध्यात्म जगत में सद्गुरु से दीक्षा प्राप्त कर मनुष्य भवसागर पार हो जाता है।

आचार्य श्रीराम शर्मा ऐसे ही सद्गुरु थे जिन्होंने इस कलयुग में इतना जप, तप एवं गायत्री महापुरश्चरण, अनुष्ठान किए हैं जितने किसी अन्य ने नहीं। अतिशयोक्ति नहीं समझना चाहिए की वह अवतारी चेतना थे। उन्होंने ही गायत्री का साक्षात्कार किया या यूं कहें की गायत्री स्वरूप हो गए। हमारा सौभाग्य है कि कि हमें ऐसे सद्गुरु प्राप्त हुए।इसके पश्चात पंचकुंडीय गायत्री यज्ञ में सैकड़ों श्रद्धालओ ने आहुतियां समर्पित की। इसी समय 29 भाई बहिनों ने गायत्री महामंत्र की दीक्षा ग्रहण की।

शाम 4:00 बजे विजय नगर स्थित पार्क में नो वृक्षों का रोपण किया गया वृक्षारोपण करते हुए पंडित श्री शर्मा ने कहा की वृक्ष  जब तक रहते हैं यज्ञ करते रहते हैं वृक्षों से ही वातावरण शुद्ध होता है और मनुष्य के द्वारा उत्पन्न की गई कार्बन डाइऑक्साइड, विषैली गैसें वृक्ष शुद्ध करते हैं ।सोसायटी अध्यक्ष पंडित अनिल मिश्रा ने आभार व्यक्त करते हुए कहा की गायत्री परिवार समाज सेवा, राष्ट्र सेवा के साथ एक चेतना उत्पन्न कर रहा है जो जनमानस के विचारों को प्रभावित कर रही है।

साय कालीन विशेष उद्बोधन के पूर्व देव पूजन का क्रम संभाग प्रभारी श्री महेश बादल ,जिला समन्वयक बी पी गर्ग एवम व्यवसाई श्री हरभजन लाल अरोरा मामाजी द्वारा संपन्न किया गया। पंडित सुनील शर्मा जी ने विस्तार से कहा की गुरु कुम्हार की भांति होता है जो मिट्टी के बर्तन बनाते समय ऊपर से तो चोट मारता है लेकिन नीचे से हाथ का सहारा दिए रहता है ।उसी प्रकार सद्गुरु अपने शिष्य के खोटों को निकालने के लिए समय-समय पर चोट तो मारता है किंतु पीछे से उसका सहारा बन जाता है। यदि कभी मनुष्य का बुरा समय आता है, कोई परेशानी आती है  तो उसे यह नहीं सोचा चाहिए की मैं निरंतर सत्कर्म करता हूं ,मैंने किसी का कुछ नहीं बिगड़ा फिर परमात्मा हमारे साथ यह क्यों कर रहा है। यह हमारा प्रारब्ध होता है क्योंकि कर्म जब पकते हैं तो उसका फल अवश्य भोगना होता  है ।यदि सतगुरु का आश्रय हमने पकड़ा है तो यह निश्चित जानिए कि आप उस संकट से भली-भांति निकल जाएंगे ।गुरु आपको डूबने नहीं देगा।

आभार प्रदर्शन करते हुए व्यवस्थापक पंकज हर्ष श्रीवास्तव ने सबसे पहला आभार गुरु सत्ता का व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु ने ही ईश्वर की पहचान कराई, दूसरा आभार पत्रकारिता जगत का जो  निरंतर सकारात्मक समाचार छाप कर जन चेतना जगाता हैं।और उपस्थित लोगों का विशेष आभार क्योंकि उनकी उपस्थिति अच्छे कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं।शांतिपाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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