मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में डॉक्टरों की मनमानी से मरीज परेशान….

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सीहोर जितेन्द्र अ

मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में डॉक्टरों की मनमानी से मरीज परेशान….

40 गांव के आदिवासी भगवान भरोसे, गरीबों की सुनने वाला कोई नहीं…

एंकर- भेरूंदा तहसील के अंतर्गत आने वाले आदिवासी बहुमूल्य क्षेत्र ग्राम लाडकुई के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की हालात इस कदर खराब है, कि 40 गांव के आदिवासी लोग इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के भरोसे डॉक्टरों के आने की आस लगाए हुए टकटकी लगाकर देखते रहते हैं। परंतु सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाडकुई में पदस्थ दो डॉक्टर की मनमानी के चलते क्षेत्र के मरीजों को झोलाछाप डॉक्टरों को दिखाने के लिए विवश होना पड़ा है।

विओ- ग्रामीणो की माने तो पदस्थ दो डॉक्टर जो एक सीहोर से अप डाउन करते हैं, वही दूसरे डॉक्टर साहब भेरूंदा में ही अपना प्राइवेट अस्पताल संचालित करते हैं, जिसके चलते एक हफ्ते एक डॉक्टर अस्पताल पहुंचता है, तो वहीं दूसरे हफ्ते दूसरा डॉक्टर अस्पताल पहुंचता है, सरकार से सैलरी तो पूरी ले रहे हैं परंतु सेवाएं बहुत ही कम दे रहे हैं डॉक्टर साहब का ओपीडी  टाइम सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक है, परंतु डॉक्टर साहब मनमर्जी से 11:00 बजे के बाद पहुंचते हैं और 3 से 4 के बीच घर के लिए निकल लेते है रात के समय अस्पताल में कोई भी डॉक्टर नहीं रहता ऐसे में अगर अस्पताल में भर्ती मरीजों एवं गर्भवती महिलाओं या नवजात शिशु की रात के समय तबीयत बिगड़ जाए तो, वह भगवान भरोसे ही रहते हैं।
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         आपको बता दें कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के विधानसभा क्षेत्र में जब स्वास्थ्य सेवाएं इस कदर खराब है, तो अन्य जगहों का आप बखूबी अंदाजा लगा सकते हैं, कथनी और करनी में कितना फर्क होता है, लाडकुई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की अनियमितताओं को लेकर कई बार जिला अधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री तक ग्रामीण शिकायत कर चुके हैं, परंतु डॉक्टरों को बीजेपी नेताओं का संरक्षण होने के कारण किसी भी अधिकारी में इतनी हिम्मत नहीं की वह डॉक्टरों पर कोई कार्रवाई कर सके।

विओ- वही देखने वाली बात यह है कि डॉक्टरों के अलावा भी अनेकों समस्याएं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में देखी जा सकती है गर्भवती महिलाओं के कमरे में एसी बंद है मरीजों के लिए लगाए गए कूलर इतनी गर्मी पढ़ने के बाद भी अभी चालू नहीं हुए हैं, यहां तक कि नर्स स्टाफ के रूम में लगे पंखे भी चालू नहीं है, अस्पताल में सोनोग्राफी व एक्सरे मशीन शोपीस बने हुए हैं, मरीजों जांच बाहर से करवानी पड़ती है जिसके लिए उन्हें मुंह मांगी रकम अदा करनी पड़ती है।
बाइट 5- रीना मालवीय, नर्स स्वास्थ्य केंद्र 

विओ-  जिसको लेकर ग्राम के सरपंच स्वरूप सिंह बनवारी ने भी मीडिया के सामने जमकर अव्यवस्थाओं के बारे में खरी खोटी सुनाई, इससे पहले भी कई बार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाडकुई की अनियमितता के मामले मीडिया द्वारा उठाया गया, परंतु आज तक उसमें किसी प्रकार का कोई सुधार नहीं हुआ जिसके चलते सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति जस की तस बनी हुई है।
बाइट 6- स्वरूप सिंह बनवारी, सरपंच ग्राम लाड़कुई 

विओ- वही डॉक्टर मनीष सारस्वत सीएचएमओ भेरूंदा से मीडिया द्वारा सवाल किया गया तो वह भी अपने ही स्टाफ को बचाते हुए नजर आए कहां की जांच कराई जाएगी देखा जाए तो इस मामले में कई बार मीडिया द्वारा सवाल खड़े किए गए लेकिन आज तक किसी सवाल का जवाब नहीं मिला ऐसे में जांच खुद एक बड़ा सवाल है।
बाइट 7- मनीष सारस्वत सीएचएमओ भेरूंदा

विओ- वही इस मामले पर सांसद रमाकांत भार्गव से मीडिया द्वारा सवाल किया गया तो उन्होने भी जांच कराकर कार्यवाही की बात कही।
बाइट 8- रमाकांत भार्गव, विदिशा सांसद 

सुपर-  जिस प्रकार से गरीब आदिवासी बिना डॉक्टर के अपनी जिंदगी को दांव पर लगाए डॉक्टरों की राह देखते रहते हैं, वही बेपरवाह डॉक्टर और प्रशासन को इनकी तनिक भी चिंता नहीं है, सरकार में अपना रसूख रखने वाले डॉक्टर के सर पर बड़े नेताओं का हाथ होने के कारण उनका आज तक कोई भी बाल भी बांका नहीं कर पाया, जिनके लिए कहना गलत नहीं होगा कि ” सईया भए कोतवाल अब डर काहे का”। वाली कहावत को चरितार्थ करते हैं।

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