ग्राम बिला खुर्द, पटेरा में चार दिवसीय नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ एवम पावन प्रज्ञा पुराण आयोजन संपन्न

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ग्राम बिला खुर्द, पटेरा में चार दिवसीय नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ एवम पावन प्रज्ञा पुराण आयोजन संपन्न
दमोहअखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में ग्राम बिलाखुर्द, तहसील पटेरा में चार दिनों तक नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ एवम पावन प्रज्ञापुराण कथा आयोजन की धूम रही।
आयोजन का शुभारंभ प्रथम दिवस भव्य कलश यात्रा से हुआ जिसमे ग्राम की सैकड़ों महिलाएं , युवतियां, सिर पर पीले कलश रखकर निकलीं जिनके साथ साथ पीत वस्त्रों में युवक एवम पुरुषों की भी लंबी कतार थी।
द्वितीय दिवस प्रातः 7 बजे से नौ कुंडीय यज्ञ शाला में यज्ञ के प्रारंभ में संगीतमय देव आव्हान हुआ तत्पश्चात सैकड़ों नर ,नारियों ,बच्चों ने अनेक पारियों में विश्व शांति के लिए गायत्री महामंत्र से आहुतियां समर्पित की।
यज्ञ का संचालन करते हुए शांतिकुंज प्रतिनिधि पंडित दिनेश दुबे ने कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं हैं जिसे गायत्री और यज्ञ के अनुष्ठान से ना प्राप्त किया जा सके।यज्ञ और गायत्री भारतीय संस्कृति के माता पिता हैं।

शाम को पावन प्रज्ञा पुराण कथा के माध्यम से पंडित दुबे ने ग्राम वासियों से कुरीतियां त्यागने का निवेदन किया। धर्म के नाम से बाहरी आडंबर, बलि, नशा सेवन ,जातिगत ऊंच नीच आदि ऐसी अनेकों कुरीतियां हैं जो हमे अधर्म के रास्ते पर ले जाती हैं जिनसे मानवता का पतन होता हैं। अतः हम सब को बिना किसी भेदभाव के ईश्वर उपासना करते हुए परिवार को संस्कारवान बनाना चाहिए।

दूसरे दिन यज्ञ के अवसर पर पूर्व सांसद एवम पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ रामकृष्ण कुसमरिया ने भी गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्माजी आचार्य से जुड़े अपने संस्मरण सुनाए।

शाम के प्रवचन में शांतिकुंज हरिद्वार से पधारे पंडित प्रभाकांत तिवारी ने अपनी ओजस्वी वाणी में दीप यज्ञ के माध्यम से गुरु और गायत्री के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि जब हमारे देश में लोग नित्यप्रति गायत्री उपासना करते हुए दैनिक यज्ञ करते थे तो देश में दूध दही की नदियां बहती थी। सारे विश्व के लोग भारत को सोने की चिड़िया कहते थे। ना तो कभी महामारी फैलती थी और ना ही कभी सूखा, अनावृष्टि, दुर्भिक्ष पड़ता था, और इसी लिए भारत को जगत गुरु की उपाधि प्राप्त थी।कालांतर में हम अपनी उपासना पद्धति से अलग होते गए और विदेशी आक्रांताओं के आक्रमण के कारण हम अपनी गौरवशाली संस्कृति को भूलते चले गए।

गायत्री परिवार ने भारत के घरों में पुनः संस्कृति जागरण का बीड़ा उठाया हैं जिससे हर घर में बच्चे संस्कार वान बने।जिस घर में नारी को सम्मान मिलता हैं वहां देवता निवास करते हैं।

आयोजन के अंतिम दिन ग्राम के अनेकों महिला, पुरुषों एवम बच्चों ने गुरुदीक्षा ली, कई गर्भवती बहिनों के पुंसवन संस्कार एवम छोटे बच्चों के विद्यारंभ संस्कार कराए गए।विशाल भंडारे के साथ अस्योजन का समापन हुआ।

इस आयोजन में समस्त ग्राम वासियों के साथ सुदामा पटेल, राम बहादुर पटेल ,पटेल मासाब, मदन रजक, कुलदीप पटेल का विशेष सहयोग रहा।

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