#chandryaan3 #विक्रम और प्रज्ञान क्या हमेशा के लिए सो गए? #trending

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विक्रम और प्रज्ञान क्या हमेशा के लिए सो गए:अभी तक नहीं भेजा कोई सिग्नल; कितना सफल रहा चंद्रयान-3—-चांद पर फिर सूरज उगा है और साउथ पोल पर धूप पहुंच गई है, लेकिन विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर ने जगने का अभी तक कोई सिग्नल नहीं भेजा। ISRO के साइंटिस्ट लगातार कोशिश कर रहे हैं। अगर विक्रम और प्रज्ञान एक्टिव हो जाते हैं, तो ये एक अप्रत्याशित सफलता होगी।स्पेस साइंटिस्ट सुवेंदु पटनायक के मुताबिक, चंद्रयान-3 के लैंडर और रोवर को चंद्रमा पर 14 दिनों तक काम करने के लिए डिजाइन किया गया था। ऐसा इसलिए क्योंकि इसके बाद यहां रात हो जाती है।
रात के समय चंद्रमा का तापमान -250 डिग्री तक गिर जाता है। ऐसे में इन 14 दिनों के दौरान ही चंद्रयान अपना काम कर चुका था और चांद की सतह से उम्मीद मुताबिक सारा डेटा ISRO साइंटिस्टों को दे चुका है।
23 अगस्त की शाम चंद्रयान-3 ने चांद के साउथ पोल पर स्थित शिव-शक्ति पॉइंट पर लैंड किया। इसके बाद शिव-शक्ति पॉइंट से 105 मीटर दूरी तय करने के बाद रात होने से पहले लैंडर और रोवर को सुला दिया गया था।
रोवर को सुलाने से पहले ऐसी दिशा में रखा गया था कि सूर्योदय होने पर सूर्य का प्रकाश सीधे सौर पैनलों पर पड़े। उम्मीद मुताबिक ऐसा ही हुआ। ऐसे में इसके जागने की उम्मीद लगाई जा रही है।
ISRO के मुताबिक, विक्रम लैंडर के कुछ सर्किट्स को सोने नहीं दिया था, वो जग रहे थे। इसके बावजूद चांद पर दिन होने के बाद जब विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर को जगाने की कोशिश की जा रही है तो उनसे कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं।
रोवर को शिव शक्ति पाइंट से 300 से 350 मीटर की दूरी तक भेजने का प्लान था। अभी उसे चांद पर पानी की मौजूदगी का भी पता लगाना था। ऐसे में अगर रोवर जग जता है तो दोबारा उसे काम में लगाया जाएगा।

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